Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
अवदाततमे युद्धबोधकालमुपेयुषि ।
जगल्लक्षाणि तिष्ठन्ति न तिष्ठन्ति च कानिचित् ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे युद्ध
जीव-संहार है, वैसे ही बोधकाल अज्ञान-संहारक है । उक्त बोधदशा प्राप्त करने पर अति स्वच्छ
हुए मुझमें लाखों जगत् रह सकते हैं और कोई भी नहीं रह सकता