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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 92, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 92, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 92 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

नक्षत्रक्षत्रसैन्यस्य रथो रंहोविबृंहितः । त्रैलोक्यसिद्धसंचारविमानधरणे हितः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं नक्षत्र रूपी राजसेना का बड़े वेग से आगे की ओर बढ़ा हुआ रथ था (प्रवह नाम का कायु नक्षत्रवक्र को धुमातादहै, यह ज्योतिषशास््र का सिद्धान्त है), त्रिलोकी में समस्त सिद्धो के संचार एवं देवताओं के विमानों के धारण में सदा अनुकूल रहता था