Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
अपूर्वाण्युपगच्छन्ति तथा पूर्वाणि यान्त्यलम् ।
संसारसरिदम्बूनि संगतानि धनानि च ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
संसाररूपी नदी के जलस्थानीय जो इष्ट-पुत्र,
मित्र आदि के समागम तथा धन हैं, वे पहले के तो चले जाते हैं और नवीन आते रहते हैं, यानी
कोई भी स्थिर नहीं रहते