Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
क्वेव कस्य कथं नाम कुत आश्वासना मुने ।
अद्य श्वो वाऽऽपदं पापो मृत्युर्मूर्ध्नि नियच्छति ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, अब आप कहिये कि मनुष्य कहाँ, किसका, किस प्रकार और कैसे विश्वास
रख सकता है, यानी इन सब प्रत्यक्ष दृष्टान्तो से मनुष्य के लिये कोई स्थान आदि ऐसा है ही
नहीं कि विश्वास रखकर विश्रान्ति ले, क्योकि क्रूर मृत्यु आज या कल अवश्य ही माथे पर
आपदाएँ प्राप्त करायेगा ही