Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 62
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हिन्दी अर्थ
शरीर तो पत्ते के सदृश गिर जानेवाला है, जीवन की स्थिति
भी जीर्णशाली है, बुद्धि अधीरता से निरन्तर ग्रस्त है ओर विषय नीरसता लिये हुए हैं