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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 63

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 63

संस्कृत श्लोक

नीतं मनोरथैरेव नीरसैर्वाऽऽयुराततम् । न मम स्वं चमत्कारकारि किंचिदपीहितम् ॥ ६३ ॥

हिन्दी अर्थ

नीरस विषयों ने ओर उनके मनोरथो ने इस बड़ी आयु को ले लिया, परन्तु चमत्कारजनक यानी उत्तम पुरुषार्थरूप चमत्कार की जननी सम्पत्ति मेरे लिये कुछ भी पैदा नहीं की