Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
मोहोऽद्य मान्यमायातो देहो नेहोपयुज्यते ।
अनास्थैवोत्तमावस्था स्थानास्थैवाधमा स्थितिः ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
आज ही
मेरा मोह मन्द पड़ा गया हे, देह यहाँ किसी काम के लिए उपयोगी नहीं है, विषयों मे आसक्ति
न करना सबसे श्रेष्ठ स्थिति है ओर जीवन में आस्था बोधकर बैठे रहना सबसे अधम स्थिति
है