Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 77
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 77 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 77
संस्कृत श्लोक
भोगाशाबद्धतृष्णानामपमानः पदे पदे ।
आलानमवलीनानां वन्यानामिव दन्तिनाम् ॥ ७७ ॥
हिन्दी अर्थ
भोगों की अभिलाषा से बद्धतृष्ण जीवों का पद-पदपर ऐसे ही अपमान होता है जैसे कि खानपानरहित,
उपवास आदि से कृश हुए बन्धनस्तम्भ में बद्ध जंगली हाथियों का होता है