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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 82

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 82 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 82

संस्कृत श्लोक

आपातमात्रमधुरा दुःखपर्यवसायिनी । मोहनायैव लोकस्य लक्ष्मीः क्षणविलासिनी ॥ ८२ ॥

हिन्दी अर्थ

लक्ष्मी ऊपर- ऊपर से ही मधुर है, अन्त में दुःख देनेवाली है, केवल लोक को मोह में डालनेवाली है तथा उसका विलास क्षण के लिए ही होता है