Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 83
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 83 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 83
संस्कृत श्लोक
आपातरमणीयानि विमर्दविसराण्यति ।
दुःखान्यापत्प्रदातृणि संगतानि खलैरिव ॥ ८३ ॥
हिन्दी अर्थ
दुष्टों के साथ किये गये मैत्री आदि सम्बन्ध
जैसे आपातरमणीय, थोड़े से संघर्षं मेँ विनाशी, दुःखरूप तथा आपत्ति देनेवाले होते हैं, वैसे
ही धन के साथ किये गये सम्बन्ध भी आपातरमणीय, थोडे में नष्ट होनेवाले, दुःखरूप तथा
आपत्ति देनेवाले होते हैं