Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 84
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 84 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 84
संस्कृत श्लोक
शरदम्बुधरच्छायागत्वर्यो यौवनश्रियः ।
आपातरम्या विषयाः पर्यन्तपरितापिनः ॥ ८४ ॥
हिन्दी अर्थ
यौवन की शोभाएँ शरत्काल के मेघ की छाया के सदृश ञजटपट
चली जानेवाली (नश्वर) हैं और विषय अविचार से रमणीय तथा परिणाम में सन्तापदायी
हँ