Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 90
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 90 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 90
संस्कृत श्लोक
झटित्येवागतो देहः कुतोऽप्यर्जुनवातवत् ।
याति पश्यत एवास्तं तरङ्गाम्बुददीपवत् ॥ ९० ॥
हिन्दी अर्थ
किसी भी अज्ञात
कारण से, अर्जुन वायु के सदुश, यह दुःखदायी देह आई तो है, परन्तु देखते-देखते ऐसे झट से
नष्ट हो जाती है, जैसे तरंग, मेघ और दीपक