Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 93, Verse 91
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 93, verse 91 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 93 · श्लोक 91
संस्कृत श्लोक
रम्येष्वरम्यता दृष्टा स्थिरेष्वस्थिरतापि च ।
सत्येष्वसत्यतार्थेषु तेनेह विरसा वयम् ॥ ९१ ॥
हिन्दी अर्थ
हम लोगों को विषयों में नीरसता इसलिए
हुई कि रम्य वस्तुओं में अरम्यता ही देखी, स्थिर वस्तुओं में अस्थिरता ही देखी और सत्यरूप
समझे गये पदार्थो मेँ असत्यरूपता देखी