Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
इच्छाद्वेषभयक्रोधलोभमोहसमन्विताः ।
मन्त्रौषधतपोदानधैर्यधर्मवशीकृताः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
वे सब इच्छा,
द्वेष, भय, क्रोध, लोभ और मोह से युक्त रहते हैं और मन्त्र,ओषध, तप, दान, धैर्य एवं धर्म से
वशीभूत होते हैं