Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
सत्त्वावष्टम्भयन्त्रेण मन्त्रेणाराधितेन वा ।
दृश्यन्तेऽपि च गृह्यन्ते कदाचित्केनचित्क्वचित् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
तब किस उपाय से उन्हे मनुष्य देख पाते है; यह कहते हैं /
सत्त्व का अवष्टम्भरूप योगधारणाका जो एक भेद है, उससे भूतों के अवलोकन के अनुकूल
बीजाक्षर से घटित रजत आदि पत्र के ऊपर लिखित कण्ठ आदि में धारण किये गये यन्त्र तथा
आराधित मन्त्र से वे दिखाई देते हैं तथा भूतविद्या जानने वाले किसी एक पुरुष के द्वारा कभी
वशीभूत होकर सेवा आदि में नियुक्त भी किये जाते हैं, किसी देश में यह प्रसिद्ध है