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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 94, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 94, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 94 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

देवयोनिर्हि सा तेन केचिद्देवोपमादयः । केचिन्नरसमश्रीकाः केचिन्नागसमन्वयाः ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

देवयोनियों के ग्यारह भेदों के भीतर यह श्रुतयोनि है, इसलिये अणिमा आदि ऐश्वर्यों के तारतम्य मरे खुखभोग भी उनमें है / यह सूचित करते हुए उनकी जाति तथा आकृति का भेद का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं / चूँकि यह भूतयोनि भी देवयोनि ही है, इसलिए इन पिशाचों में कोई देवरूप ऐश्वर्य सम्पन्न होते हैं, कोई मनुष्यों के समान लक्ष्मी से सम्पन्न होते हैं और कोई साँपों के सदुश होते हैं