Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
न मां पश्यन्ति चन्द्रार्कशक्रा हरिहरादयः ।
न देवसिद्धगन्धर्वकिंनरा नाप्सरोगणाः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
उस समय मुझे न तो सूर्य, चन्द्र, इन्द्र तथा हरि, हर आदि देख पाते थे और न सिद्ध, गन्धर्व,
किन्नर तथा अप्सराएँ ही देख पाती थीं