Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
महारामायणप्रायशास्त्रप्रेक्षणमात्रतः ।
अन्तःशीतलतोदेति परार्थेषु हिमोपमा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र महारामायण जैसे शास्त्रों के अवलोकन से ज्ञानियों को समस्त पदार्थों में हितसदृश
सर्वोत्कृष्ट अन्त:शीतलता प्रादुर्भूत होती है