Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
मोक्षः शीतलचित्तत्वं बन्धः संतप्तचित्तता ।
एतस्मिन्नपि नार्थित्वमहो लोकस्य मूढता ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, शीतलचित्तता यानी चित्त का
शीतल होना मोक्ष है तथा सन्तप्त चित्तता यानी चित्तका सन्तप्त होना ही बन्ध है । परन्तु ऐसे भी
मोक्ष में संसार की अभिलाषा नहीं होती । अहो संसार की मूढता कैसी आश्चर्यमयी है