Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 95, Verse 31

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 95, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 95 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

श्रीवाल्मीकिरुवाच । इत्युक्तवत्यथ मुनौ दिवसो जगाम सायंतनाय विधयेऽस्तमिनो जगाम । स्नातुं सभा कृतनमस्करणा जगाम श्यामाक्षये रविकरैश्च सहाजगाम ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

आनन्दधन पखह्ययरमात्मास्वरूप हो जाता है / श्रीवाल्मिकीजी ने कहा : मुनिजी के ऐसा कहने पर दिन बीत गया । सूर्य भगवान्‌ अस्ताचल को चले गये । इधर मुनियों की सभा भी सायंकाल के कृत्य के लिए स्नान करने चली गई ओर रात बीतने पर भगवान्‌ सूर्य की किरणों के साथ फिर मुनियों की सभा आकर जम गई