Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
चिन्मात्रपुरुषो जन्तुर्म्रियते यदि नाम वा ।
ततो मरिष्यत्तत्पुत्रो निःसंदेहं पितुर्मृतौ ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
विति का मरण या भ्रेदन मानने में कोई प्रमाण नहीं है ओर यदि मानोगे तो सभी का मरण हो
जायेगा, यह कहते हैं ।
यदि चेतनमात्र स्वरूप जीव का मर जाना ही मान लिया जाय, तो पिता के मर जाने पर उसका
पुत्र भी मर जायेगा, इसमें किसी भी प्रकार का सन्देह करना ही नहीं चाहिए, क्योकि पिता पुत्र तो
एकरूप ही हैं, भिन्न नहीं है, इसलिए चेतनात्मा जीव नहीं मरता, यही मत निश्चित है