Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
न चाद्यापि मृतं राम चिन्मात्रं कस्यचित्क्वचित् ।
न च शून्या स्थिता भूमिस्तस्माच्चित्पुरुषोऽक्षयः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, आज तक किसी भी
स्थान में किसी का भी चिन्मात्रस्वरूप मरा नहीं है और चेतन से शून्य भूतल भी किसी समय नहीं
रहा है, इसलिए पुरुषात्मा चेतन को अविनश्वर ही समझिए