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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 96, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 96, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 96 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

चिदहं गगनादच्छा नित्यानन्ता निरामया । किं जीवितं मे किं वापि मरणं वा सुखासुखे ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं चेतनरूप हूं, गगन से भी अति स्वच्छ हूँ, सनातन हूँ, व्यापक हूँ और सब तरह के विकारों से शून्य हूँ, इसलिए मेरा क्या जीना, क्या मरना और क्या सुख-दुःख ?