Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
जातौ जातौ कतिपये व्यपदेश्या भवन्ति ते ।
येषां यान्ति प्रकाशेन दिवसा भास्वतामिव ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
सत्य हैं, ऐसे विद्वान दुर्लभ हैं; फिर भी मनुष्य, गन्धर्व देव, दानव आदि में प्रयत्नपूर्वक खोजने
से कैसे विद्वान् मिल सकते हैं; ऐसा कहते हैं /
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामजी, देव, दावन, मनुष्य आदि हर एक जाति में कुछ श्रेष्ठ
तत्त्वज्ञ विद्यमान हैं, जिनका कि “यो यो देवानाम्" इत्यादि श्रुतियों मे उल्लेख पाया जाता है,
प्रकाशमान सूर्य के सदृश उन्हीं तत्त्वज्ञो के प्रकाश से दिवस दिवसरूप होते हैं