Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
अधश्चोर्ध्वं च धावन्तश्चक्रावर्तविवर्तनैः ।
सर्वे तृणवदुह्यन्ते मूढा मोहभवाम्बुधौ ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
उन तत्त्वज्ञो
को छोड़कर दूसरे सभी मूढ हैं ओर वे मोहरूपी महासागर में संसार चक्रों के आवर्तन परावर्तन
ऊपर-नीचे दौड़ते हुए तृण के सदृश बहते हैं