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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

पातिता मदसंपन्ना दानवा दानवारिभिः । गजा इव निरालाना घोरे नारायणावटे ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

मद से चूर दानव तो दानव शत्रु देवताओं के द्वारा नारायणरूपी गड्ढे में ऐसे गिराये गये हैं, जैसे कि आलान से (बोधने के खंभे से) रहित गज बड़े गड्ढे में गिराया गया हो