Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
न गन्धमपि गन्धर्वा दर्शयन्ति विवेकजम् ।
गीतपीतपरामर्शाः सरन्ति हरिणा इव ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
गन्धर्व लोगों की तो बात ही जाने
दीजिये । वे तो गानरूपी मद्यमें रात-दिन आसक्त (मरत) रहते हैं, इसलिए वे विवेकजनित
ज्ञान का लेश भी दिखला नहीं सकते । हिरनों के सदृश भ्रान्त होकर मृत्युरूपी व्याध के समीप
वे जा रहे हैं