Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
दन्तिनामिव मत्तानां रंहसा हरिणारिणा ।
कृतः करिष्यसि त्वं च राक्षसानां परिक्षयम् ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
जो राक्षस हैं , उनका तो शत्रुभूत विष्णु के द्वारा पूर्व में अनेक बार वेगपूर्वक विनाश किया गया
है ओर आप भी भविष्य में करेगे । राक्षस काम, बल और शौर्य के कारण हाथी के सदृश सदा
उन्मत्त रहते हैं इसलिए इनके प्रमाद का फल तो प्रत्यक्ष ही है