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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 97, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 97, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 97 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

पानभोजनजम्बाले गहने योगिनीगणाः । दुर्गन्धपल्वलोद्गारे पतिताः पामरा इव ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

जो योगिनियों का गण है, वह तामस भोगासक्तिरूप तालाब के दल-दल में जो कि सुरापान, रूधिरपान तथा मांसभोजन आदि रूप कीचड़ों से भरा है, पामरों के सदृश फँ सा हुआ है, उनको भी विवेक मात्र नहीं है, यह समझना चाहिए