Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
पूर्वात्पूर्वतरस्यास्य स्वप्नस्यावयवस्थितौ ।
सत्येवासत्यरूपायां पृथ्व्यादिकलना कृता ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्व
चित् के स्वप्न से सृष्टि के आदि में पृथिवी आदि पदार्थबुद्धि का उदय हुआ स्वप्न के पदार्थ में
सत्यता बुद्धि काल्पनिक है, वास्तविक नहीं है ॥३ ८॥ इस प्रकार पूर्व से पूर्वतर अनादि प्रवाहरूप
स्वप्न के अवयवा में मूढों ने सत्य पृथ्वी आदि की कल्पना ऐसे ही कर डाली जैसे कि आधुनिक
असत्य वस्तु में सत्य कल्पना की जाती है