Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
सा च भ्रान्तिस्तथा रूढा यथासत्यैव सत्यताम् ।
परमामागता तत्तु सत्यमत्यन्तनिर्मलम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
वह भ्रान्ति वैसी बद्धमूल हुई कि निपट असत्य
होती हुई भी परम सत्यता को प्राप्त हो गई । किन्तु परम सत्य चिति तो अत्यन्त निर्मल है, उसमें
जडतारूप मलका रत्तीभर भी सम्बन्ध नहीं है