Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 99, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 99, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 99 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
जायन्ते च म्रियन्ते च निराधारेऽम्बरे खगाः ।
शून्यैकविषयास्तेषां स्वास्थ्यं न भवति क्षणम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
एकमात्र शून्य विषयवाले गगनपक्षी
निराधार आकाश में उत्पन्न होते हैं और वहींपर मर जाते हैं, उनको कुछ भी विषय नहीं मिलता है,
परन्तु क्षणभर वे स्वस्थ नहीं बैठते यानी वे अपने प्रयत्न से तनिक भी हटते नहीं