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श्रीमद्भागवत के अनुसार ‘माया’ को कैसे पहचाना जा सकता है?
माया क्या है और उसे कैसे पहचानें? श्रीमद्भागवत के अनुसार त्रिगुण, भ्रम और भागवत श्रवण द्वारा माया की पहचान और उससे मुक्ति का शास्त्रीय मार्ग।

श्रीमद्भागवत में 'माया' और आत्म-समर्पण का क्या संबंध बताया गया है?
माया और आत्म समर्पण — दोनों का गहरा संबंध है। जब जीव ईश्वर की शरण लेता है, माया के आवरण टूटते हैं। कालिय नाग और ब्रह्माजी के प्रसंग से समझें शरणागति का रहस्य।

श्रीकृष्ण ने गोपियों को “आसक्ति” और “समर्पण” में क्या भेद समझाया?
आसक्ति और समर्पण दिखने में एक जैसे पर भीतर से बिल्कुल अलग। गोपियों का प्रेम क्यों भक्ति का आदर्श है? श्रीमद्भागवत के वेणुगीत और स्कन्दपुराण से जानें।

आसक्ति और दायित्व में अंतर कैसे स्पष्ट करें?
आसक्ति और दायित्व — दोनों काम एक जैसे दिखते हैं पर भीतर से अलग। गीता, योगवासिष्ठ और विवेकचूड़ामणि के आधार पर जानें कब प्रेम आसक्ति बनता है और कर्म दायित्व।

जीवन्मुक्त की संगति से साधारण व्यक्ति को क्या लाभ होता है?
जीवन्मुक्त के पास बैठने से मन शांत क्यों होता है? योगवासिष्ठ, विवेकचूड़ामणि और श्रीमद्भागवत के आधार पर जानें सत्संग का वास्तविक स्वरूप और उसके अद्भुत लाभ।

जीवन्मुक्त की परीक्षा या पहचान कैसे की जा सकती है?
असली जीवन्मुक्त को कैसे पहचानें — वस्त्र से नहीं, चमत्कार से नहीं। योगवासिष्ठ और स्कन्दपुराण के अनुसार जानें उनके आचरण, समता और निर्विकारता के सच्चे लक्षण।

क्या जीवन्मुक्त का बाह्य आचरण आम लोगों से अलग होता है?
जीवन्मुक्त बाहर से बिल्कुल सामान्य लग सकता है — पर भीतर से? योगवासिष्ठ और विवेकचूड़ामणि के आधार पर जानें बालकवत, निद्रालुवत जीवन्मुक्त का असली स्वरूप।

लोकसंग्रह और वैराग्य में संतुलन कैसे साधा जाए?
क्या सन्यास लेना ज़रूरी है या संसार में रहकर भी मुक्ति मिल सकती है? भगवद्गीता और योगवासिष्ठ के आधार पर जानें राजा जनक और ऋषभदेव का आदर्श संतुलन।

ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद व्यवहार में संतुलन कैसे साधें?
ब्रह्मज्ञान के बाद जीवन कैसे जीएं? रमण महर्षि के पंखे वाले उदाहरण से लेकर योगवासिष्ठ और विवेकचूड़ामणि तक — जानें संसार में रहते हुए भी निर्लिप्त रहने का रहस्य।