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मोह का स्वरूप क्या हैं?
मोह और प्रेम दिखने में एक जैसे पर भीतर से अलग। प्रेम देता है, मोह पकड़ता है। योगवासिष्ठ, विवेकचूड़ामणि और भागवत के आधार पर जानें मोह का वास्तविक स्वरूप और निवारण।

आत्मा और परमात्मा का स्वरूप क्या है?
बचपन का सवाल — मैं कौन हूँ? शास्त्र कहते हैं — तुम वही हो जो सब कुछ जानता है। श्रीमद्भागवत, योगवासिष्ठ और उपनिषदों के आधार पर जानें आत्मा और परमात्मा का अद्वैत स्वरूप।

'ज्ञानबन्धु' और 'ज्ञानी' में क्या अंतर है?
जो शास्त्र पढ़े पर जीवन न बदले — वह ज्ञानबन्धु है। जिसका जीवन ज्ञान से बदल जाए — वह ज्ञानी। योगवासिष्ठ के चित्र की अग्नि और नट की उपमा से जानें यह महत्वपूर्ण अंतर।

भक्ति और ज्ञान के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाएं क्या हैं और उनका निवारण कैसे किया जा सकता है?
माया, अहंकार, आसक्ति और वासनाएं — ये सब भक्ति और ज्ञान की राह में बाधाएं हैं। भागवत, योगवासिष्ठ और गीता के आधार पर जानें इन बाधाओं को पहचानने और दूर करने के उपाय।

भक्ति और ज्ञान में क्या संबंध है? क्या ज्ञान के बिना भक्ति संभव है?

ज्ञान प्राप्त करने के लिए किस गुण का सबसे अधिक महत्व है और क्यों?
ज्ञान के लिए सबसे ज़रूरी गुण कौन सा है? भक्ति — क्योंकि वह मैं को जलाती है और परमात्मा को प्रकट करती है। गीता, विवेकचूड़ामणि और नारद भक्ति सूत्र से जानें क्यों।

त्रिगुण (सत्त्व, रज, तम) कर्म और ज्ञान को कैसे प्रभावित करते हैं?
तीन मित्र, एक किताब — तीन अलग परिणाम। यही त्रिगुण हैं। भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत के आधार पर जानें सत्त्व, रजस और तमस कैसे हमारे कर्म और ज्ञान को रंगते हैं।

आत्मा और परमात्मा की अभिन्नता को अनुभव करने में अहंकार की क्या भूमिका है और इसे कैसे दूर किया जा सकता है?
लहर समुद्र से अलग नहीं — पर लहर को लगता है कि वह अलग है। यही अहंकार है। योगवासिष्ठ और श्रीमद्भागवत के आधार पर जानें अहंकार की भूमिका और उसे दूर करने के उपाय।

आत्मा और परमात्मा की अभिन्नता को अनुभव करने के लिए कौन से साधन बताए गए हैं?
रमण महर्षि ने कहा — परमात्मा का अनुभव नहीं होगा, क्योंकि तुम परमात्मा हो। तो साधना क्यों? जानें भागवत, गीता और योगवासिष्ठ से अभिन्नता अनुभव के श्रवण, कर्मयोग और तपस्या जैसे साधन।